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20 साल बाद कश्मीर में आतंक फैलाने लौट आया है यह खतरनाक आतंकी
HINDI NEWS18
Wed, 12 Jun 2019 21:20

20 साल बाद कश्मीर में आतंक फैलाने लौट आया है यह खतरनाक आतंकी

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Wed, 12 Jun 2019 21:20

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में हुए एक आतंकवादी हमले में सीआरपीएफ के 5 जवान शहीद हो गए.

20 साल बाद कश्मीर में आतंक फैलाने लौट आया है यह खतरनाक आतंकी
इस दौरान सुरक्षाबलों ने एक आतंकवादी को भी मार गिराया है. CRPF अधिकारियों के मुताबिक यह हमला केपी जनरल बस स्टैंड के पास हुआ. वाहन में बैठे आतंकवादी ने सुरक्षाबलों पर अचानक गोली चलानी शुरू कर दी. सीआरपीएफ के जवानों को कानून-व्यवस्था बनाए रने के लिए ड्यूटी पर तैनात किया गया था. घायल जवानों को अस्पताल में भर्ती किया गया है.इस हमले में सीआरपीएफ के एएसआई नेहरू शर्मा, कॉन्सटेबल सतेन्द्र शर्मा, कॉन्सटेबल एमके कुशवाहा शहीद हो गए हैं. घायलों में एसएचओ अनंतनाग अरशद अहमद की हालत गंभीर बताई जा रही है. उन्हें उपचार के लिए श्रीनगर ले जाया गया है.जबकि केदार नाथ, राजेंद्र सिंह का अनंतनाग के जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है. हमले में 18 वर्षीय एक स्थानीय  महिला भी घायल हुई है, जिसकी पहचान सनोबर जैन के तौर पर हुई है. इस हमले की जिम्मेदारी अल-उमर-मुजाहिदीन आतंकी गुट ने ली है.20 साल बाद मजबूत हुआ है अल-उमर-मुजाहिदीन का सरगना मुश्ताक अहमद जरगारसंगठन अल-उमर-मुजाहिदीन, जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का ब्रेक अवे फैक्शन है जो कि 1989 में उससे अलग हुआ था. पिछले कई सालों से यह संगठन लगभग निष्क्रिय था और इस हमले का अब वह दावा कर रहा है. ुफिया एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक इस तरीके के हमले कर आतंकी अमरनाथ यात्रा से पहले घाटी में अपनी सशक्त मौजूदगी का दर्ज कराने की फिराक में है.कश्मीर न्यूज एजेंसी GNS के मुताबिक, अल उमर मुजाहिदीन आतंकी गुट का मुिया मुश्ताक अहमद जरगार है. जरगार का आतंकी संगठन पाकिस्तान से रन करता है. छूटने के बाद से जरगार शांत था लेकिन 20 सालों बाद वह फिर से सक्रिय हो चुका है.मसूद अज़हर का पुराना साथी है मुश्ताक

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जिन आतंकियों को कंधार कांड के बाद भारत को रिहा करना पड़ा था, उनमें जरगार भी शामिल था. जरगार को भी मसूद अज़हर के साथ रिहा किया गया था. 1999 में एक भारतीय फ्लाइट IC 814 को हाईजैक करके अफगानिस्तान के कंधार ले जाया गया था और फ्लाइट के यात्रियों की रिहाई के बदले कई आतंकियों को रिहा करने की मांग की गई थी. 1999 में हुई इसी घटना को कंधार कांड के नाम से जाना जाता है.इसमें छोड़े गए तीन आतंकियों में मसूद अज़हर और शे उमर के अलावा मुश्ताक अहमद जरगार तीसरा था. इसके पहले जरगार के संगठन अल-उमर-मुजाहिदीन ने कश्मीर घाटी के जकूरा इलाके में एसएसबी के काफिले पर हमला किया था, जिसमें एक जवान की मौत हुई थी. लेकिन अब उसका संगठन बड़े हमलों में शामिल हो रहा है.जरगार का नाम सुनते ही कश्मीरियों को 90 के दशक की हिंसा की आ जाती है यादकश्मीर में जरगार का नाम सुनते ही लोगों को वहां 90 के दशक में हुई बर्बर हिंसा की यादें ताजा हो जाती हैं. इस हिंसा के पीछे इसी मुश्ताक अहमद जरगार का नाम था. कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि जरगार को घाटी में फिर से एक्टिवेट किया गया है और उसे यहां आतंक फैलाने के लिए पाकिस्तानी ूफिया एजेंसी आईएसआई का पूरा संरक्षण मिला हुआ है.केंद्रीय गृहमंत्री की बेटी का कर लिया था अपहरणमुश्ताक अहमद जरगार को सुरक्षाबलों ने 1992 में गिरफ्तार किया था. दरअसल 12 अगस्त, 1989 को हुए तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद के अपहरण में भी उसका नाम सामने आया था.रूबिया के अपहरण के बाद उसे छोड़ने के बदले जरगार ने पांच आतंकवादियों की रिहाई की मांग की थी. तत्कालीन सरकार को यह मांग माननी पड़ी थी. इसके बाद मुश्ताक ने श्रीनगर में कई हत्या की वारदातों को अंजाम दिया था. इसमें कश्मीरी पंडितों की नृशंस हत्या भी शामिल थी.15 मई, 1992 को जरगार को सुरक्षाबलों ने पकड़ा था. इसी गिरफ्तारी के बाद से उसका संगठन अल-उमर-मुजाहिदीन त्म हो गया था, जो अब फिर से शक्तिशाली हो रहा है.यह भी पढ़ें: पहाड़ी पार करने से पहले ही क्रैश हो गया था AN-32 विमानएक क्लिक और बरें ुद चलकर आएगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स