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तमिलनाडु: अवैध दवाएं दे महिलाओं से कराया जा रहा 10 घंटे काम
HINDI NEWS18
Wed, 19 Jun 2019 00:06

तमिलनाडु: अवैध दवाएं दे महिलाओं से कराया जा रहा 10 घंटे काम

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Wed, 19 Jun 2019 00:06

तमिलनाडु में पीरियड्स के दौरान काम करने के लिए महिलाओं को दी जा रही हैं अवैध दवाएं (सांकेतिक तस्वीर)News18HindiUpdated: June 19, 2019, 12:06 AM ISTतमिलनाडु से एक परेशान करने वाली ़बर सामने आई है.

तमिलनाडु: अवैध दवाएं दे महिलाओं से कराया जा रहा 10 घंटे काम
यहां कई टेक्सटाइल कारानों में महिला  कर्मचारियों को पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को कम करने के लिए अवैध दवाइयां दी जा रही हैं. थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन ने तमिलनाडु में 100 महिलाओं के साथ की गई बातचीत के आधार पर यह ुलासा किया है.इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कारानों  में काम करने वाली लगभग हर महिला को बिना लाइसेंस के इस तरह अवैध ड्रग्स दिए जा रहे हैं. ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि ये महिलाएं पीरियड्स के दौरान छुट्टी न लें और उनका उत्पादन प्रभावित न हो. हैरानी की बात यह है कि ये दवाएं तमाम महिला कर्मचारियों को बिना किसी चिकित्सकीय सलाह के धड़ल्ले से दी जा रही है.रिपोर्ट में एक महिला का जिक्र किया गया है. जिसे रोजाना लगभग 10 घंटे काम करना होता है. उसने बताया कि वह नहीं चाहती की पीरियड के दर्द का असर उसके काम पर पड़े और उसकी मजदूरी में कटौती हो. इसलिए एक दिन उसने अपने फैक्ट्री सुपरवाइटर से दर्द कम करने की दवा मांगी तो उसने महिला को एक दवा दे दी. महिला ने बताया कि वह दवा का नाम तो नहीं बता सकती लेकिन वह उसके रंग से उसे पहचान सकती है. महिला ने बताया कि इसे ाने के बाद महिला का दर्द तो कम हो गया लेकिन उसे दूसरी समस्याएं होनी लगीं.थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इन सभी महिलाओं को पीरियड पेन के लिए बिना लाइसेंस वाली दवाएं दी जा रही थीं. कई महिलाओं का कहना है कि इन दवाओं का वे नाम नहीं जानती लेकिन रंग से वे उन्हें पहचान सकती हैं और इन दवाओं को ाने के बाद उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं हुई हैं. जो महिलाएं इन दवाओं का लगातार सेवन करती आ रही हैं, उन्होंने इसकी शिकायत की है. इन महिलाओं का कहना है कि उन्होंने कभी इन दवाओं की एक्सपायरी डेट भी नहीं देी है.रिपोर्ट के अनुसार इन दवाओं के लिए कभी डॉक्टरों की सलाह नहीं ली जाती है. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने भी माना है कि वह इन श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच करेगा. महिलाओं ने बताया कि इन दवाओं के बारे में कभी कंपनी ने उन्हें जानकारी नहीं दी थी.सरकार के आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में लगभग 40,000 कपड़ा काराने है. यहां लगभग 300,000 से अधिक महिला श्रमिकों काम करती हैं. इन कारानों में मु्य रूप से गरीब, अनपढ़ और हाशिए पर रहने वाले समुदायों की युवा और गांव की महिलाएं काम करने आती हैं.यह भी पढ़ें: इन सात वजहों से हर भारतीय कर सकता है चंद्रयान-2 मिशन पर गर्व

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